कर्नाटक के गडग में प्राचीन रामलिंगेश्वर मंदिर में तोड़फोड़ 2026

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यह जानकर वास्तव में बहुत दुःख होता है कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को इस तरह नुकसान पहुँचाया जा रहा है। ऐतिहासिक मंदिर केवल पत्थर की इमारतें नहीं, बल्कि हमारी आस्था और इतिहास के जीवंत प्रतीक होते हैं।

यहाँ इस घटना पर आधारित एक ब्लॉग पोस्ट है:


आस्था पर प्रहार: कर्नाटक के गडग में प्राचीन रामलिंगेश्वर मंदिर में तोड़फोड़

भारत की ऐतिहासिक धरोहरें हमारी पहचान हैं, लेकिन हाल ही में कर्नाटक के गडग (Gadag) जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर, जहाँ पूरा देश महादेव की भक्ति में लीन था, वहीं गडग के प्राचीन रामलिंगेश्वर मंदिर में उपद्रवियों द्वारा शिवलिंग और अन्य मूर्तियों को खंडित करने की निंदनीय घटना सामने आई है।

घटना का विवरण

यह घटना गडग जिले के एक गाँव में स्थित सदियों पुराने रामलिंगेश्वर मंदिर की है। जानकारी के अनुसार:

  • महाशिवरात्रि की रात: जब भक्त त्योहार मनाकर घर लौटे, उसके बाद उपद्रवियों ने मंदिर परिसर में प्रवेश किया।
  • मूर्तियों का अपमान: गर्भगृह में स्थित मुख्य शिवलिंग के साथ-साथ वहां स्थापित अन्य देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
  • सांप्रदायिक तनाव: घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मंदिर?

रामलिंगेश्वर मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि यह इस क्षेत्र की प्राचीन वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना भी है। ऐसे मंदिरों का निर्माण अक्सर चालुक्य या होयसला काल के दौरान हुआ होता है, जो हमारी गौरवशाली विरासत का हिस्सा हैं। मूर्तियों को खंडित करना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि हमारी साझा संस्कृति पर हमला है।

समाज और प्रशासन की प्रतिक्रिया

इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:

  1. सुरक्षा में चूक: क्या हमारी प्राचीन धरोहरें बिना किसी सुरक्षा के इसी तरह उपद्रवियों के हवाले रहेंगी?
  2. धार्मिक भावनाएं: महाशिवरात्रि जैसे पवित्र दिन पर ऐसी घटना जानबूझकर शांति भंग करने की कोशिश प्रतीत होती है।

स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ने का आश्वासन दिया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मूर्तियों का विधिवत पुनरुद्धार किया जाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।

कर्नाटक के गडग जिले में हुई यह घटना वाकई चिंताजनक है। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थलों पर ऐसी हरकतें न केवल आस्था को ठेस पहुँचाती हैं, बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी बिगाड़ने का प्रयास करती हैं।

चूंकि आपने सहमति दी है, आइए इस मंदिर के ऐतिहासिक महत्व और इस तरह की घटनाओं के कानूनी व सामाजिक पहलुओं पर एक संक्षिप्त नजर डालते हैं:

रामलिंगेश्वर मंदिर का ऐतिहासिक संदर्भ

गडग जिला अपनी वास्तुकला (Architecture) के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है, जिसे अक्सर ‘पश्चिमी चालुक्य वास्तुकला का केंद्र’ माना जाता है।

  • ऐतिहासिक काल: यहाँ के अधिकांश मंदिर 11वीं और 12वीं शताब्दी के आसपास के हैं।
  • शिल्पकला: इन मंदिरों में पत्थर पर की गई नक्काशी इतनी बारीक होती है कि इसे ‘पत्थर पर कविता’ कहा जाता है।
  • सांस्कृतिक धरोहर: रामलिंगेश्वर जैसे मंदिर स्थानीय समुदायों के लिए केवल मंदिर नहीं, बल्कि उनके पूर्वजों की कलात्मक विरासत होते हैं।

ऐसे मामलों में कानून क्या कहता है?

भारत में प्राचीन स्मारकों और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुँचाना एक गंभीर अपराध है:

  1. IPC की धारा 295: किसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान को क्षति पहुँचाना या अपवित्र करना। इसमें कारावास और जुर्माने दोनों का प्रावधान है।
  2. प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम: यदि मंदिर संरक्षित स्मारक की श्रेणी में आता है, तो इसके तहत और भी कठोर कार्रवाई की जाती है।

अब आगे क्या?

ऐसी घटनाओं के बाद समाज में शांति बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। प्रशासन आमतौर पर निम्नलिखित कदम उठाता है:

  • CCTV निगरानी: भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रमुख प्राचीन मंदिरों में कैमरों की व्यवस्था।
  • मूर्ति पुनरुद्धार (Restoration): पुरातत्व विभाग की मदद से खंडित मूर्तियों को शास्त्रीय विधि से ठीक करना या उनकी रक्षा करना।

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