ब्रेकिंग: आतंक और नक्सलवाद पर गृह मंत्री का कड़ा प्रहार!

देश की आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कड़े तेवर दिखाए हैं। दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके और देश से नक्सलवाद के खात्मे को लेकर उनके बयानों ने एक नई बहस छेड़ दी है।आतंक और नक्सलवाद पर गृह मंत्री का ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ प्रहार: अब आर-पार की जंग

भारत की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बीता कुछ समय काफी हलचल भरा रहा है। एक तरफ देश की राजधानी दिल्ली में ऐतिहासिक लाल किले के पास आतंकी साजिश ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया, तो दूसरी तरफ गृह मंत्री अमित शाह ने ‘लाल आतंक’ यानी नक्सलवाद की समाप्ति के लिए एक निश्चित समयसीमा (Deadline) तय कर दी है।

1. लाल किला हमला: “दुनिया को जाएगा कड़ा संदेश”

दिल्ली के लाल किले के पास हाल ही में हुए धमाके ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित शाह ने स्पष्ट किया कि इस हमले के दोषियों को ऐसी सजा दी जाएगी जो पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बनेगी।

  • सख्त जांच: NIA, NSG और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस मामले की गहराई से जांच कर रही है।
  • अमित शाह का रुख: उन्होंने कहा, “अब वो दौर बीत गया जब आतंकी हमलों को भूल जाया जाता था। आज की सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चलती है। आतंकी अब जहां हमला करेंगे, वहीं दफन किए जाएंगे।”

2. नक्सलवाद का अंत: 31 मार्च 2026 की डेडलाइन

गृह मंत्री ने संसद और छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित कार्यक्रमों में एक बहुत बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि 31 मार्च 2026 तक भारत पूरी तरह से ‘नक्सल मुक्त’ हो जाएगा।

इस मिशन के मुख्य बिंदु:

  • हथियार छोड़ो या परिणाम भुगतो: शाह ने नक्सलियों को सीधा संदेश दिया है कि वे हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल हों और पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं। यदि वे हथियार नहीं छोड़ते, तो सुरक्षा बल मुंहतोड़ जवाब देंगे।
  • विकास और सुरक्षा का तालमेल: सरकार केवल सैन्य कार्रवाई नहीं कर रही, बल्कि बस्तर जैसे इलाकों में सड़क, बिजली, बैंक और स्कूलों का जाल बिछा रही है ताकि नक्सली विचारधारा की जड़ें ही खत्म हो जाएं।
  • सफलता के आंकड़े: पिछले 10 वर्षों में नक्सली हिंसा में 53% की कमी आई है और छत्तीसगढ़ के कई गढ़ अब सुरक्षा बलों के नियंत्रण में हैं।

निष्कर्ष: सुरक्षित भारत की ओर बढ़ते कदम

अमित शाह के ये बयान दर्शाते हैं कि केंद्र सरकार अब देश के भीतर सक्रिय किसी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। चाहे वह सीमा पार से प्रेरित आतंकवाद हो या दशकों पुराना नक्सलवाद, सरकार की ‘क्लियर कट’ पॉलिसी सुरक्षा और विकास को सर्वोपरि मानती है।

“आतंकवाद और नक्सलवाद मानवता के लिए कैंसर के समान हैं, और मोदी सरकार इस कैंसर को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।” — अमित शाह


आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि 2026 तक देश पूरी तरह से नक्सलवाद से मुक्त हो पाएगा? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।

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